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अटल विहारी वाजपेयी की कविता- “नादान पड़ोसी को चेतावनी “

Last Updated on October 12, 2021 by Manoranjan Pandey

अटल विहारी वाजपेयी की कविता- नादान पड़ोसी को कड़ा सन्देश नहीं चेतावनी 

श्री अटल विहारी वाजपेयी की लिखी यह कविता आज के समय में हमारे पड़ोसी देश को लेकर उतनी हीं प्रासंगिक है जितनी तब थी. अटल जी कविता संग्रह ‘मेरी इक्यावन कविताएं’ से लिया गया यहाँ कविता मैं पुलवामा में शहीद अपने भारत माँ के सपूतों को समर्पित करता हुँ. 

🙏जय हिन्द 🙏

नादान पड़ोसी को चेतावनी “मेरी इक्यावन कविताएं “

एक नहीं, दो नहीं, करो बीसों समझौते
पर स्वतंत्र भारत का मस्तक नहीं झुकेगा।

अगणित बलिदानों से अर्जित यह स्वतंत्रता
त्याग, तेज, तप, बल से ‍रक्षित यह स्वतंत्रता
प्राणों से भी प्रियतर यह स्वतंत्रता।

इसे मिटाने की ‍साजिश करने वालों से
कह दो चिनगारी का खेल बुरा होता है
औरों के घर आग लगाने का जो सपना
वह अपने ही घर में सदा खरा होता है।

अपने ही हाथों तुम अपनी कब्र न खोदो
अपने पैरों आप कुल्हाड़ी नहीं चलाओ
ओ नादान पड़ोसी अपनी आंखें खोलो
आजादी अनमोल न इसका मोल लगाओ।

पर तुम क्या जानो आजादी क्या होती है
तुम्हें मुफ्‍त में मिली न कीमत गई चुकाई
अंगरेजों के बल पर दो टुकड़े पाए हैं
मां को खंडित करते तुमको लाज न आई।

अमेरिकी शस्त्रों से अपनी आजादी को
दुनिया में कायम रख लोगे, यह मत समझो
दस-बीस अरब डॉलर लेकर आने वाली
बरबादी से तुम बच लोगे, यह मत समझो।

धमकी, जेहाद के नारों से, हथियारों से
कश्मीर कभी हथिया लोगे, यह मत समझो
हमलों से, अत्याचारों से, संहारों से
भारत का भाल झुका लोगे, यह मत समझो।

जब तक गंगा की धार, सिंधु में ज्वार
अग्नि में जलन, सूर्य में तपन शेष
स्वातंत्र्य समर की वेदी पर अर्पित होंगे
अगणित जीवन, यौवन अशेष।

अमेरिका क्या संसार भले ही हो विरुद्ध
काश्मीर पर भारत का ध्वज नहीं झुकेगा,
एक नहीं, दो नहीं, करो बीसों समझौते
पर स्वतंत्र भारत का मस्तक नहीं झुकेगा।

अटल विहारी वाजपेयी की कविता

 साभार : “मेरी इक्यावन कविताएं “

कवि : स्वर्गीय श्री अटल विहारी ‘वाजपेयी’
भूतपूर्व प्रधानमंत्री (भारत)

 

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13 thoughts on “अटल विहारी वाजपेयी की कविता- “नादान पड़ोसी को चेतावनी “

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