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फिल्म केसरी “दुनियां के महानतम युद्धों में से एक की कहानी”

Last Updated on October 12, 2021 by Manoranjan Pandey

दुनियां के महानतम युद्धों में से एक की कहानी “फिल्म केसरी”

बलिदान कर रंग ‘केसरी’ भारत की आत्मा का रंग “केसरी”और भारत के वीरों का बलिदान “केसरी”.

फिल्म केसरी

भारत वीरों की भूमी है, इस देश के हर कोने में ऐसे वीरों ने जन्म लिया जिनका भारत के इतिहास में बड़े सम्मान के साथ नाम लिया जाता है. आज हमलोग उन्हीं वीरों में से कुछ महान वीरों की चर्चा फिल्म केसरी के माध्यम से कर रहे हैं.

समस्त सिख समुदाय को लख लख धन्यवाद एवं उन माताओं को कोटि कोटि नमन जिन्होंने भारत को महान वीर सपूतों से नवाजा.

आज खबर काम की ब्लॉग पर आपको दुनियाँ की कुछ महान युद्धों में से एक सारागढ़ी का युद्ध के बारे में एक फिल्म के माध्यम से जानकारी देंगे.

आ चुकी है फिल्म केसरी भारत का सबसे अद्भुत युद्ध की कहानी.

अक्षय कुमार की फिल्म केसरी रिलीज हो चुकी है जो दुनियाँ के सबसे अद्भुत युद्ध की कहानी पर आधारित है जिसमें एक तरफ 21 सिख सैनिक थे तो दूसरी तरफ 12000 अफगानी.

शायद आप लोगों ने “ग्रीक सपार्टा” और “परसियन” की लड़ाई के बारे मेँ सुना होगा इनके ऊपर 300 से अधिक फिल्में भी बनी है.

पर अगर आप “सारागढ़ी” के युद्ध के बारे में पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि इससे महान लड़ाई भारतभूमि में शायद हीं हुई होगी.

यह बात 1897 की है जब नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर स्टेट (आज के पाकिस्तान का खैबर पख्तूनख्वा ) में 12 हजार अफगानों ने हमला कर दिया. उनका मकसद गुलिस्तान और लोखार्ट के किलों पर कब्जा करना था.

गुलिस्तान और लोखार्ट के किलों को महाराजा रणजीत सिंह ने बनवाया था. इन किलों के पास सारागढी में एक सुरक्षा चौकी थी, जंहा पर 36वीं सिख रेजिमेंट के 21 जाट जवान तैनात थे. ये सभी जवान माझा क्षेत्र के थे और सभी जाट क्षत्रिय परिवार से थे. 36वीं सिख रेजिमेंट में केवल साबत सूरत (जो केशधारी हों) सिख भर्ती किये जाते थे.

हवलदार ईशर सिंह गिल के नेतृत्व में तैनात इन 21 जवानों को पहले ही पता चल गया था कि 12 हजार अफगानों से जिन्दा बचना नामुमकिन है. फिर भी इन जवानों ने अपनी जान कि बाजी लगाकर लड़ने का फैसला लिया.

तारिक़ थी 12 सितम्बर 1897 और भारतभूमि की धरती पर एक ऐसी लड़ाई हुयी जो दुनिया की पांच महानतम लड़ाइयों (युद्धों ) में शामिल हो गयी. एक तरफ 12 हजार अफगान थे तो दूसरी तरफ 21 भारतीय सिख वीर.

अफगान के अब्दाली की क्रूरता के बारे में आपको पता ही होगा. उस समय अफगानों से देश को बचाना सबसे जरूरी था. खासकर पंजाब इनके निशाने पर था, वहाँ पर इनका खतरा मंडराता रहता था. अंग्रेजों से कहीं ज्यादा इन अफगानों की क्रूरता और दुष्टता का खतरा रहता था.

रण भूमी सज गई थी और रणभेरी भी बज गई थी. इस सारागढ़ी में यंहा बड़ी भीषण लड़ाई हुयी और इस युद्ध में लगभग 1600 से 2400 अफगान मारे गये और अफगानों की भारी तबाही हुयी. सभी सिख जवान आखिरी सांस तक लड़े और इन किलों को बचा लिया. और अफगानों की बड़ी हार हुयी.

जब ये खबर यूरोप पंहुची तो पूरी दुनिया स्तब्ध रह गयी, ब्रिटेन की संसद में सभी ने खड़ा होकर इन 21 वीरों की बहादुरी को सलाम किया. इन सभी वीर शहीदों को मरणोपरांत इंडियन ऑर्डर ऑफ मेरिट दिया गया. जो आज के समय दिया जाने वाला अवार्ड परमवीर चक्र के बराबर था. अबतक भारत के सैन्य इतिहास का, ये युद्ध के दौरान सैनिकों द्वारा लिया गया सबसे विचित्र अंतिम फैसला था.

इस केसरी बलिदान की चर्चा पूरी दुनियां इतनी ज्यादा हुई कि UNESCO ने इस युद्ध को अपनी 8 महानतम युद्धों में शामिल किया. इस लड़ाई के आगे स्पार्टन्स की बहादुरी फीकी पड़ गयी, और न जाने कितनी बहादुरी के किस्से इन योद्धाओ के आगे बौने पड़ गये.

पर मुझे दुख होता है कि जो बात हर भारतीय को पता होनी चाहिए उसके बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं. इस महानतम लड़ाई के बारे में यूरोप के स्कूलों में पढाई जाती है पर हमारे यंहा इसको जानते तक नहीं.

इन 21 वीरों के नाम इस प्रकार है जो निचे दिए जा रहे हैं.

हवलदार ईशर सिंह गिल (रेजिमेंटल नम्बर 165)
नायक लाल सिंह (332)
नायक चंदा सिंह (546)
लांस नायक सुंदर सिंह (1321)
लांस नायक राम सिंह (287)
लांस नायक उत्तर सिंह (492)
लांस नायक साहिब सिंह (182)
सिपाही हीरा सिंह (359)
सिपाही दया सिंह (687)
सिपाही जीवन सिंह (760)
सिपाही भोला सिंह (791)
सिपाही नारायण सिंह (834)
सिपाही गुरमुख सिंह (814)
सिपाही जीवन सिंह (871)
सिपाही गुरमुख सिंह (1733)
सिपाही राम सिंह (163)
सिपाही भगवान सिंह (1257)
सिपाही भगवान सिंह (1265)
सिपाही बूटा सिंह (1556)
सिपाही जीवन सिंह(1651)
सिपाही नन्द सिंह (1221)

आज हमारी वीरता पर केसरी फ़िल्म रिलीज हो गई है जो हर भारतीय के लिए गर्व की बात है.

फिल्म केसरी जरुर देखिये ये फिल्म परिवार, बच्चो सहित देखिये, मैं ये दावे से कहता हुँ कि आपको गर्व होगा भारतीय होने पर. और गुस्सा भी आयेगा की हमको ये और ऐसी बहुत सी घटनाओं का इतिहास क्यूँ नही पढाया गया.

फिल्म केसरी में अक्षय कुमार का अभिनय कमाल का है. आपको अक्षय कुमार का बदला हुआ रूप देखना चाहते हैं तो फिल्म केसरी अवश्य देखिये.

मैं अपने ब्लॉग खबर काम की https://khabarkaamki.com/ के माध्यम से सरकार से माँग करता हुँ कि इस तरह के वीर गाथा को पाठ्यक्रम में जोड़ा जाय और हमारे बच्चों को अपने देश के वीरों और उनके महान बलिदान के बारे में बताया जाय.

जय हिन्द.

जरुर देखिये फिल्म केसरी…….✍

कृपया कमेंट के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें.

धन्यवाद.

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