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धनतेरस का महत्व क्या है, (Dhanteras ka Mahatva Kya Hai) और | धनतेरस क्यों मनाया जाता हैं?

धनतेरस का महत्व क्या है, और धनतेरस क्यों मनाया जाता हैं?

Last Updated on March 12, 2022 by Manoranjan Pandey

धनतेरस का महत्व क्या है ? | Dhanteras ka mahatva kya hai ? | धनतेरस कब है | धनतेरस 2022 कब है | 2022 धनतेरस डेट क्या है | धनतेरस 2022 कब है ? Diwali kab hai | दिवाली से पहले धनतेरस क्यों मानते हैं ? Dhanteras kyo manate hain ?

भारत में विभिन्न धर्मों के अनुयाई साथ मिलजुल कर रहते हैं जो कई मान्यताओं को मानते हैं तो ऐसे में भारत में कई तरह के त्यौहार भी मनाए जाते हैं और अगर कहा जाए कि भारत त्यौहारों का देश है तो यह भी गलत नहीं होगा। भारत में जो त्यौहार सबसे उच्च स्तर पर मनाए जाते हैं उन्हीं में से एक दिवाली भी है और दिवाली के ही साथ आने वाला एक त्यौहार ‘धनतेरस’ हैं। देश में रहने वाला हर व्यक्ति धनतेरस को मनाता है लेकिन काफी कम लोग जानते हैं कि ‘धनतेरस का महत्व क्या है’ और ‘धनतेरस क्यों मनाया जाता है’? तो चलिए आज इस त्यौहार के बारे में जानते हैं आसान भाषा मे।

 

धनतेरस का महत्व और धनतेरस क्या हैं? Dhanteras Kya Hai

 

धनतेरस का त्यौहार सनातन धर्म से संबंधित एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जिसे भारतीय पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी अर्थात तेरस को मनाया जाता है और यही कारण है कि इस त्यौहार को ‘धनतेरस’ का नाम दिया गया हैं। धनतेरस के त्यौहार को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है और यह त्यौहार भगवान कुबेर का माता लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है। वहीं अगर डेमोक्रेटिक तौर पर बात की जाए तो धनतेरस के दिन भारत सरकार की तरफ से राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाया जाता है।

 

यह बात हम सभी भली-भांति जानते हैं कि धनतेरस भारत में सबसे अधिक और बड़े धूमधाम से मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है जिसका एक मुख्य कारण इसका देश के सबसे बड़े त्यौहार दीवाली के साथ जुड़ा हुआ होना भी हैं। धनतेरस के बारे में एक खास बात यह है कि इस त्यौहार से संबंधित मान्यता है कि इस दिन सोना या फिर किसी भी नई चीजों खरीदना शुभ होता है तो ऐसे में यह दिन देश के व्यापारियों और उद्योगों के लिए एक बेहतरीन दिन मान जाता है।

 

धनतेरस क्यों मनाया जाता है? Dhanteras Kyo Manaya Jata Hai ?

 

धनतेरस देश के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है लेकिन इसके बावजूद भी काफी सारे लोग यह नहीं जानते कि ‘धनतेरस क्यों मनाया जाता है’ तो बता दे कि मान्यता के अनुसार समुंद्र मंथन के दौरान विष्णु के अंश भगवान धन्वंतरि दोनो हाथो मे कलश लेकर प्रकट हुए थे। क्योंकि कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे तो इस दिन उनके प्रकट होने के उपलक्ष में धनतेरस का त्यौहार मनाया जाता है।

 

भगवान धन्वंतरि को सुख समृद्धि से संबंधित मानते हैं तो ऐसे में इस दिन सोना आदि खरीदना शुभ माना जाता हैं। धनतेरस के त्योहार के बारे में कहा जाता है कि यह त्योहार धन और आरोग्य से जुड़ा हुआ होता है। क्योंकि यह त्यौहार धन से जुड़ा हुआ है तो भगवान कुबेर की और आरोग्य से जुड़ा हुआ है तो भगवान धन्वंतरि की इस दिन पूजा की जाती है और साथ ही माता लक्ष्मी की भी पूजा का महत्व हैं। मूल्यवान धातु, आभूषण, वाहन, घर, संपत्ति, सोना, चांदी, बर्तन, कपड़े आदि खरीदने के लिए यह सबसे बेहतरीन मौका माना जाता है।

 

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धनतेरस का महत्व क्या है ? Dhanteras Ka mahatva kya Hai ?

 

धनतेरस का त्यौहार देश में मनाए जाने वाले सबसे बड़े त्योहारों में से एक है जो न केवल सनातन धर्म बल्कि कई अन्य धर्मो जैसे कि जैन धर्म आदि से भी संबंधित है। यह त्यौहार ना केवल सांस्कृतिक तौर पर अन्य त्योहारों की तरह अपना महत्व रखता है बल्कि औद्योगिक तौर पर देखा जाए तब भी यह त्यौहार काफी महत्व रखता है। अगर धनतेरस के सांस्कृतिक महत्व की बात की जाए तो कहा जाता है कि भगवान धन्वंतरि इस दिन समुंद्र मंथन से प्रकट हुए थे और क्योंकि वह आरोग्य के प्रतीक हैं तो इस त्यौहार को आरोग्य से संबंधित माना जाता है।

 

वहीं अगर धनतेरस के त्यौहार के औद्योगिक महत्व की बात की जाए तो इस त्यौहार को देश में न केवल सनातन धर्म के अनुयाई बल्कि सभी मान्यताओं को मानने वाले लोग शुभ मानते हैं जिसके चलते इस दिन काफी ज्यादा खरीददारी की जाती है जिससे ना केवल व्यवसायिक को प्रोत्साहन मिलता है बल्कि कई रोजगार भी पैदा होते हैं। पिछले एक साल में कोविड-19 के व्यवसायियों को काफी नुकसान हुआ है तो ऐसे में धनतेरस के दिन वह थोड़ा अधिक मुनाफा कमाने में सक्षम हो सकेंगे जिससे कि उनसे जुड़े हुए लोग या फिर कहा जाए तो उनके लिए काम करने वाले लोग भी रोजगार प्राप्त कर सकेंगे।

 

धनतेरस के त्यौहार से सम्बंधित पौराणिक कथाएं Story Of Dhantersa In Hindi

 

सनातन धर्म के बारे में वैसे तो जितनी बातें कही जाए उतनी ही कम है लेकिन इस धर्म से संबंधित है खास बात यह भी है कि सनातन धर्म से जुड़े हुए जितने भी त्यौहार है उन सभी का कोई ना कोई पौराणिक महत्व जरूर होता है और गीत ऐसा ही धनतेरस के साथ भी है। धनतेरस से संबंधित कई पौराणिक कथाएं प्रचलन में है, जो कुछ इस प्रकार है:

 

समुन्द्र मंथन की कथा: (samudra manthan Ki katha)

धनतेरस से संबंधित जो सबसे अधिक प्रचलित कथा है वह समुद्र मंथन की कथा है जिससे इस त्यौहार की शुरुआत भी हैं। इस कथा के अनुसार देवता और राक्षसों के बीच अपने आप को साबित करने के लिए जब समुद्र मंथन का युद्ध चल रहा था तब उस समय पर मंथन के द्वारा कई अद्भुद रहस्य खुल रहे थे।

 

अमृत और विष दोनों इस मंथन से निकले थे लेकिन साथ में काफी कुछ और भी हुआ था जैसे कि माता लक्ष्मी भी इसी मंथन से निकली थी और भगवान धन्वंतरी भी इसी मंथन से निकले थे तो ऐसे में जिस दिन भगवान धन्वंतरि इस मंथन से निकले थे वह दिन धनतेरस के दिन के रूप में मनाया जाता है।

 

वामन अवतार से सम्बंधित कथा: (Vaman Awatar Katha) 

धनतेरस के त्योहार से संबंधित एक और लोकप्रिय कथा भगवान विष्णु के वामन अवतार से संबंधित है। माना जाता है कि देवताओं को राजा बलि से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया था और वह राजा बलि के पास गए थे। वामन अवतार ने बलि से तीन पग रखने के लिए जमीन मांगी तो बली ने वामन अवतार को इजाजत दे दी।

 

वामन अवतार ने पहले पद में पूरी जमीन और दूसरे पग में पूरे ब्रह्मांड को नाप लिया। अब तीसरा पग रखने के लिए कोई जगह नहीं बची तो भगवान ने तीसरा पग बलि के सर पर रख दिया और वह इस दान के बदले में अपना सब कुछ त्याग बैठा। इस तरह से धनतेरस के दिन ही देवताओं को बलि के भय से आजादी मिली।

 

राजा हेम से सम्बंधित कथा : (Raja hem ki katha)

धनतेरस से संबंधित एक पौराणिक कथा राजा हेम से भी जुड़ी हुई हैं। कहा जाता है कि एक बार हेम नाम के एक महान राजा हुए करते थे जिन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई थी लेकिन उनके पुत्र की कुंडली देखकर ज्योतिषी ने कहा था कि जिस दिन उसका विवाह होगा उसके 4 दिन बाद इसकी म्रत्यु हो जाएगी। इसको टालने के लिए राजा ने पुत्र को ऐसी जगह भेज दिया जहा स्त्री की छाया भी उस पर ना पड़े।

 

एक दिन एक राजकुमारी राजकुमार के पास से गुजरी और राजकुमार मोहित हो गया और उसने उस राजकुमारी से गन्धर्व विवाह कर लिया। इसके बाद जब यमराज उसे लेने आये तो नववाहिता का विलाप सुनकर यमदूत ने यमराज से अकाल मृत्यु को रोकने का उपाय पूछा तो यमराज ने कहा कि ‘कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी रात को जो मेरी पूजा करेगा उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं होगा’ इसलिये धनतेरस के दिन घर से बाहर दक्षिण दिशा की तरफ दीप जलाया जाता हैं।

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धनतेरस 2022 में कब मनाया जाएगा?

 

जैसे कि हम सभी को पता है कि सनातन धर्म से संबंधित अधिकतर त्यौहार हिंदी पंचांग के अनुसार मनाए जाते हैं तो धनतेरस का त्यौहार भी कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को मनाया जाएगा जो दो नंबर को है अर्थात यह त्यौहार इस बार 22 अक्टूबर को मनाया जाएगा। यानी कि अगर आपको सोना, बर्तन, कपड़े आदि खरीदना है तो आप 22 अक्टूबर के दिन खरीद सकते हैं।

 

धनतेरस 2022 के मुहूर्त क्या हैं?

 

धनतेरस का महत्व क्या है यह जान लेने के बाद अब धनतेरस का शुभ मुहूर्त क्या है यह भी जान लेते हैं। सनातन धर्म मे किसी भी त्यौहार के कुछ मुहूर्त होते हैं जिसमे विशेष निर्धारित कार्य किये जाते हैं। धनतेरस 2021 से सम्बंधित मुहूर्त कुछ इस प्रकार हैं:

 

  • त्रिपुष्कर योग : सुबह 6:06 से लेकर 11:31 तक

 

  • धनतेरस मुहूर्त : सुबह 6:18 से लेकर 8:11 तक

 

  • अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:42 से लेकर 12:26 तक

 

  • विजय मुहूर्त : दोपहर 1:33 से लेकर 2:18 तक

 

  • गोधूलि मुहूर्त : शाम 5:05 से लेकर 5:29 तक

 

  • प्रदोष काल : शाम 5:35 से लेकर 8:11 तक

 

  • वृषभ काल : शाम 6:18 से लेकर 8:14 तक

 

  • निशिता मुहूर्त : रात 11:16 से लेकर 12:07 तक

 

यह हैं धनतेरस 2022 के मुहूर्त! जिनके अनुसार आप अपनी खरीदारी कर सकते हैं और त्यौहार मना सकते हैं।

 

धनतेरस पूजन कैसे करते हैं?

 

सनातन धर्म से जुड़े हुए हर त्यौहार में पूजा का अपना एक अलग महत्व होता है जिसमें त्योहार से जुड़े हुए देवताओं के साथ कुछ मुख्य देवता हो जैसे कि भगवान गणेश को पूजा जाता है। धनतेरस पूजन के दिन भगवान धन्वंतरि के साथ भगवान कुबेर और भगवान लक्ष्मी जी को पूजा जाता है। अगर आप नहीं जानते कि धनतेरस पूजन कैसे करते हैं तो बता दे कि धनतेरस पूजन की प्रक्रिया कुछ इस प्रकार है:

 

  • सबसे पहले एक चौकी स्थापित करें और उस चौकी पर भगवान धन्वंतरि, भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी की फोटो या प्रतिमा रखे।

 

  • भगवान की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करने के बाद दीपक, धूप या अगरबत्ती जलाने के साथ फुल समर्पित करें और खरीदे हुए बर्तन व गहने समक्ष में रखे।

 

  • इसके बाद कुछ देर तक लक्ष्मी स्त्रोत, लक्ष्मी चालीसा और कुबेर यंत्र का जाप करना है और अंत में भगवान को मिठे का भोग लगाना है।

 

इस तरह से आसानी से धनतेरस पूजन किया जा सकता है। अगर सटीक रूप से सही मुहूर्त पर की जाती है तो पूजा करने वाले भक्तों को इसका लाभ मिलता है। और धनतेरस का महत्व क्या है यह समझ आता है। 

 

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धनतेरस के दिन गहने और बर्तन खरीदना शुभ क्यों माना जाता है?

 

यह बात हम सभी भली-भांति जानते हैं कि सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए धनतेरस के दिन गहने और बर्तन खरीदना शुभ होता है और हम सभी ऐसा करते भी हैं लेकिन काफी कम लोगों को यह पता है कि ‘धनतेरस के दिन गहने और बर्तन क्यों खरीदे जाते हैं’? तो बता दे कि जब भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे तो उनके हाथ में कलश था। भगवान धन्वंतरि को धातु प्रिय है और यही कारण है कि इस दिन गहनें वह बर्तन खरीदे जाते हैं। इसके अलावा कुछ चीजों को छोड़कर लगभग सभी चीजें खरीदना इस दिन शुभ मानी जाती है।

 

धनतेरस पर झाड़ू खरीदने का क्या महत्व है

धनतेरस पर झाड़ू खरीदने का महत्व: इसके पीछे भी पौराणिक मान्यता है कि धनतेरस के दिन अगर आप कुछ भी खरीदारी करते हैं तो वह तेरह गुना और बढ़ जाती है। इस दिन को बड़ी शुभ माना जाता है और इस अवसर पर झाड़ू खरीदने की भी परंपरा है। कहते हैं कि धनतेरस के दिन हर घर में एक नई झाड़ू अवश्य खरीदना चाहिए। क्योंकि मत्स्य पुराण के अनुसार झाड़ू को लक्ष्मी का रूप माना जाता है। कहते हैं कि घर में झाड़ू में पैर नहीं लगाना चाहिए अगर पैर लग जाए तो इसे अशुभ माानते हैं। इसलिए घर में झाड़ू से साफ-सफाई करने के बाद झाड़ू ऐसी जगह रखा जाता है जहां पैर नहीं लगे।

ऐसी मान्यता है कि झाड़ू, सुख-शांति बढ़ाने और दुष्ट शक्तियों का सर्वनाश करने वाला होता है। यह भी मान्यता है कि झाड़ू हमारे घरों से दरिद्रता का नाश करती है। धनतेरस के दिन घर में नई झाड़ू से झाड़ लगाने और साफ-सफाई करने से ऋण से भी मुक्ति मिलती है, ऐसा माना जाता है। इन्ही मान्यताओं के कारण इस दिन झाड़ू खरीदने की पुरानी परंपरा है। शास्त्रों और अन्य मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने से माँ लक्ष्मी का आपके घर में सदा के लिए वास रहता है और वह रुठकर घर से बाहर नहीं जाती हैं। और सबसे मुख्य बात ये भी है कि जहाँ स्वक्षता होती है वहीँ माता लक्ष्मी का वास होता है। क्योकि झाड़ू स्वक्षता का प्रतिक है। कहते हैं कि झाड़ू से घर में सकारात्मकता का संचार होता है। 

 

धनतेरस के दिन क्या क्या नहीं करना चाहिए?

 

यह बात हम सभी भली-भांति समझ चुके हैं कि धनतेरस के दिन खरीदारी करना शुभ होता है लेकिन कुछ काम ऐसे भी है जो धनतेरस के दिन बिल्कुल नहीं करना चाहिए और वह काम निम्न है:

 

  • धनतेरस के दिन किसी को भी उधार देना अशुभ माना जाता है।
  • धनतेरस से पहले ही घर की सारी गंदगी बाहर निकाल दी जाए तो बेहतर रहता है क्योंकि अगर घर में इस दिन गंदगी रहती है तो सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नहीं हो पाता।
  • धनतेरस के दिन कभी भी केवल भगवान कुबेर की पूजा नहीं करनी चाहिए बल्कि साथ में माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा भी करना अनिवार्य माना जाता है।
  • धनतेरस के दिन किसी भी नकली और खंडित मूर्ति आदि का पूजन नहीं करना चाहिए। अगर संभव हो तो धातु से बनी हुई माता लक्ष्मी का पूजन करें।
  • धनतेरस के दिन शीशे के बर्तन नहीं खरीदना चाहिए क्योंकि यह अशुभ माने जाते हैं।
  • धनतेरस के दिन किसी भी तरह के नकली प्रतीक घर में नहीं लाने चाहिए।
  • धनतेरस के दिन घर में कुमकुम, हल्दी है चंदन जैसे शुभ चीजों से स्वास्तिक और ओम बनाना चाहिए।

 

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निष्कर्ष!

 

यह बात हम सभी जानते हैं कि धनतेरस देश में सबसे अधिक मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है लेकिन इससे संबंधित पर्याप्त जानकारी देश में रहने वाले कई लोगों को नहीं है जो वाकई में एक बुरी बात है। इस लेख में हमने ‘धनतेरस क्या है’, ‘धनतेरस का महत्व क्या है’ और ‘धनतेरस क्यों मनाया जाता हैं’ ‘Dhanteras kya hai’ जैसे सवालों का जवाब देते हुए धनतेरस से संबंधित सभी जानकारी आसान भाषा में देने की कोशिश की है। उम्मीद है कि आपको यह लेख पसंद आया होगा और अगर हां तो इस लेख को सोशल मीडिया पर शेयर करना ना भूले।

धन्यवाद 

 

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