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“मानवता की कहानी” छोटा लड़का और कुत्ते का पिल्ला

“मानवता की कहानी” छोटा लड़का और कुत्ते का पिल्ला

Last Updated on March 16, 2021 by Manoranjan Pandey

मानवता की कहानी “छोटा लड़का और कुत्ते का पिल्ला”

ईश्वर ने मनुष्य जीवन शायद इसीलिए दिया है कि वो परोपकार करे, ना सिर्फ मानव के लिए बल्कि पशु पक्षियों और अन्य जीव एवं प्राणी के लिए भी उपकार करे. यदि कभी भी हम किसी भी प्राणी को मुसीबत में पायें तो मनुष्य होने के नाते हमारा ये कर्तब्य बनता है कि हम उसकी मदद करें.

आइये एक कहानी के माध्यम से मानवता के मूल्य को समझने का प्रयास करते हैं.

मानवता की कहानी Manavta ki kahani

 

मानवता की कहानी “छोटा लड़का और कुत्ते का पिल्ला”

किसी शहर मे एक दुकानदार ने अपने दरवाजे के ऊपर एक संकेत तख्ती लटका रखा था, जिसमें लिखा था ” कुत्ते के पिल्ले बिकाऊ हैं ” …. Puppies for Sale !
इस तरह के संकेत तख्ती किसी ग्राहक को आकर्षित करने का एक तरीका होता है, इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है.

वहाँ से गुजर रहा एक लड़के ने वो संकेत यानि Sale Board देखा और मालिक से संपर्क किया. उस लड़के ने दुकानदार से पूछा, आप पिल्लों को कितने दाम में बेचने जा रहे हैं?

दुकान के मालिक ने जवाब दिया, यही कोई 1500 से 2000 रूपये तक.

छोटे लड़के ने अपनी जेब से कुछ खुल्ला (change) निकला. लड़के ने कहा: कि मेरे पास सिर्फ 250 रूपये हैं, तो क्या मैं उन्हें देख सकता हूँ? क्या आप मुझे दोगे?

दुकान का मालिक मुस्कुराया और एक जोर की सीटी बजाई। उसके दूकान के गलियारे से भागती हुई एक महिला आई, उसके बाद पाँच नन्हे नन्हे फर के छोटे छोटे पिल्ले भी उसके पीछे पीछे आये.

उनमें से एक पिल्ला बाकी पिल्लों से काफी पीछे चल रहा था। तभी उस लड़के कि नजर पीछे चल रहे पिल्ले पे जा टिकी जो लंगड़ा कर किसी प्रकार चल पा रहा था. तुरंत ही छोटे लड़के ने लंगड़ाते हुए, पिल्ला को अपने गोद में उठा लिया. उसने दुकानदार से कहा, ‘इस छोटे कुत्ते के साथ क्या हुआ है? यह ठीक से चल क्यों नहीं पा रहा है? क्या ये लगड़ा है?

दुकानदार ने बताया कि किसी पशुचिकित्सक से दिखाया था, तो उसने पिल्ले की जांच की तो पता चला कि उसके पास हिप सॉकेट नहीं है। यह हमेशा जिंदगी भर लंगड़ा हीं रहेगा.

यह जानकर छोटा लड़का उत्साहित हो गया, और बोला महाशय मैं यही पिल्ला खरीदना चाहता हूं. दुकान के मालिक ने आश्चर्य से कहा, नहीं नहीं आप उस छोटे कुत्ते को नहीं खरीदना चाहेंगे. यदि आप वास्तव में उसे ले जाना चाहते हैं, तो मैं उसे आपको ऐसे हीं बिना कीमत चुकाए हीं दे दूंगा.

दुकानदार की बात सुन कर वह छोटा लड़का हैरान रह गया, उसे बुरा लगा की दुकानदार उसे मुफ्त में यह पिल्ला क्यों डे रहा है. उसने अपनी उंगली से इशारा करते हुए सीधे दुकान के मालिक की आँखों में देखा, और कहा:
मैं नहीं चाहता कि आप उस पिल्ले को मुझे मुफ्त में दें, उस छोटे से कुत्ते की कीमत हर दूसरे कुत्ते के बराबर है और मैं आपको इसकी पूरी कीमत चुकाऊंगा. अभी तो मैं आपको सिर्फ 250 रूपये हीं दूंगा, और जब तक मैं उसके लिए पुरा भुगतान न कर दूँ , तब तक एक महीने यह आपके पास हीं रहेगा.

दुकान के मालिक ने फिर उस छोटे लड़के की बात काटते हुये कहा: कि आप इस छोटे लंगड़े कुत्ते को कैसे खरीद सकते हैं? खरीदना हीं चाहते हैं तो किसी स्वस्थ पिल्ले को खरीदिये। यह तो कभी भी अन्य पिल्लों की तरह आपके साथ दौड़ने और खेलने-कूदने में सक्षम नहीं होगा।

फिर अचानक दुकानदार को आश्चर्यचकित करते हुये छोटा लड़का नीचे ज़मीन पर बैठ गया और अपनी पैंट को निचे से मोड़ता हुआ अपनी बाएं पैर को दिखाया जो एक बड़ी metal Rod से फिक्स्ड था.

उसने फिर से दुकान के मालिक को देखा और धीरे से जवाब दिया, मैं खुद इतनी अच्छी तरह से चल फिर नहीं सकता, तो यह मेरे जैसा हीं हुआ न ! मुझे लगता है कि इस छोटे पिल्ला को भी किसी ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता होगी जो इसके दर्द और जज़्बात को समझता हो!’

दोस्तों मानवता की कहानी के माध्यम से समझिये कि उस लड़के ने लगड़े पिल्ले को हीं क्यों ख़रीदा? क्योंकि उस पिल्ले के दर्द और दुःख को वह अच्छी तरह समझ सकता था. क्योंकि वह स्वयं भी अपंग था एक पाँव से लगड़ा था.

“जिन्होंने वास्तव में दुःख की अनुभूति की हो, वही दूसरे के दुःख दर्द को समझ सकता है. दूसरों की सहायता करना हीं मानवता का सबसे बड़ा धर्म है.

धन्यवाद

उम्मीद करता हुँ आपको यह प्रेरणाभरी, मानवता की कहानी पसंद आयी होगी. कृपया कमेंट के माध्यम से हमें बतायें.

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