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मातृभूमि कविता- वो वीर निराला भारत का, पुलवामा के शहीदों को समर्पित

Last Updated on February 21, 2019 by Manoranjan Pandey

मातृभूमि कविता- वो वीर निराला भारत का, पुलवामा के शहीदों को समर्पित

मातृभूमि कविता 

वो अंधकार में जिया नहीं,
वो था अमर उजाला भारत का ;

जो शहीद हो गया मातृभूमि के लिए,
वो वीर निराला भारत का ;

कौन कहता है, था वो कोई मतवाला,
वो तो था भारत माँ का लाला ;

जो शहीद हो गया पलभर में,
था वो मातृभूमि का रखवाला ;

अपने भार्या के गहने लेकर,
भारत माँ का सौंदर्य बढ़ा डाला ;

अपनी माता के आँसू लेकर,
भारत माता के चरणों को धो डाला ;

अपनी बहन की राखी की रक्षा का,
हिस्सा भी इस मातृभूमि को डे डाला ;

वो अजर हो गया अमर हो गया,
ये तन मातृभूमि को समर्पित कर डाला ;

है मेरा नमन बार बार उनको,
जिसने था इस लाल को पाला ;

वो जिया नहीं युग युग तक जियेगा,
जिसने ऐसा इतिहास रच डाला ;

अपने हीं रक्त की बूंदो से,
इतिहास का रंग बदल डाला ;

वो अंधकार में जिया नहीं,
वो था अमर उजाला भारत का ;

जो शहीद हो गया मातृभूमि के लिए,
वो वीर निराला भारत का.

जय जय जजनी जय मातृभूमि
जय जय भारत

कवि : श्री पंकज जोशी
भिंड – मध्य प्रदेश के रहने वाले हैं.

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धन्यवाद.

About Manoranjan Pandey

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