आज का विचार, खबर काम की

मेरा रंग दे बसंती चोला ” शहीद दिवस ” | भगत सिंह के अनमोल विचार

मेरा रंग दे बसंती चोला shahid divas

Last Updated on March 23, 2021 by Manoranjan Pandey

आज का विचार – मेरा रंग दे बसंती चोला

मेरा रंग दे बसंती चोला

मेरा रंग दे बसंती चोला : यही वो दिन था 23 मार्च 1931, जब अंग्रेजो ने ने भारत मां के वीर सपूतों, भगत सिंह जी , सुखदेव जी और राजगुरु जी को एक ही दिन, एक साथ फांसी के फंदे पर चढ़ा दिया था। हमारे तीनों महान क्रांतिकारियों की याद में आज के दिन शहीदी दिवस मनाया जाता है। भगत सिंह जी , सुखदेव जी और राजगुरु जी ने तब ‘पब्लिक सेफ्टी और ट्रेड डिस्ट्रीब्यूट बिल’ के विरोध में सेंट्रल असेंबली में बम फेंके थे, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और फांसी की सजा दे दी गई। आज पूरा देश भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के बलिदान को याद कर रहा है। कोरोना की पाबंदियों के कारण पाबंदियां लगी हैं, तो इंटरनेट मीडिया के जरिए इन्हें याद करने वाले संदेश जारी किए जा रहे हैं। यहां पढ़िए भगत सिंह के जोश जगाने वाले विचार

shaheedi Diwas 2021: भगत सिंह के अनमोल विचार

1 . जिंदगी तो सिर्फ अपने कंधों पर जी जाती है, दूसरों के कंधे पर तो सिर्फ जनाजे उठाए जाते हैं।“ 

2 . मेरा धर्म देश की सेवा करना है।
प्रेमी, पागल और कवि एक ही चीज से बने होते हैं।
देशभक्तों को अक्सर लोग पागल कहते हैं।
सूर्य विश्व में हर किसी देश पर उज्ज्वल हो कर गुजरता है

परन्तु उस समय ऐसा कोई देश नहीं होगा जो भारत देश के सामान इतना स्वतंत्र, इतना खुशहाल, इतना प्यारा हो 

3 . यह एक काल्पनिक आदर्श है कि आप किसी भी कीमत पर अपने बल का प्रयोग नहीं करते, नया आन्दोलन जो हमारे देश में आरम्भ हुआ है और जिसकी शुरुवात की हम चेतावनी दे चुके हैं वह गुरुगोविंद सिंह और शिवाजी महाराज, कमल पाशा और राजा खान, वाशिंगटन और गैरीबाल्डी, लाफयेत्टे और लेनिन के आदर्शों से प्रेरित है। 

मनुष्य/इन्सान तभी कुछ करता है जब उसे अपने कार्य का उचित होना सुनिश्चित होता है, जैसा की हम विधान सभा में बम गिराते समय थे। जो मनुष्य इस शब्द का उपयोग या दुरुपयोग करते हैं उनके लाभ के हिसाब के अनुसार इसे अलग-अलग अर्थ और व्याख्या दिए जाते हैं।

4 . राख का हर एक कण मेरी गर्मी से गतिमान है। मैं एक ऐसा पागल हूं जो जेल में भी आजाद है।

5 . यदि बहरों को सुनना है तो आवाज़ को बहुत जोरदार होना होगा। जब हमने बम गिराया तो हमारा धेय्य किसी को मारना नहीं थ। हमने अंग्रेजी हुकूमत पर बम गिराया था । अंग्रेजों को भारत छोड़ना चाहिए और उसे आज़ाद करना चहिये। 

6 . किसी को ‘क्रांति’ शब्द की व्याख्या शाब्दिक अर्थ में नहीं करनी चाहिए। जो लोग इस शब्द का उपयोग या दुरूपयोग करते हैं उनके फायदे के हिसाब से इसे अलग अलग अर्थ और अभिप्राय दिए जाते हैं।

7 . किसी भी इंसान को मारना आसान है, परन्तु उसके विचारों को नहीं। महान साम्राज्य टूट जाते हैं, तबाह हो जाते हैं, जबकि उनके विचार बच जाते हैं।


8 . जरूरी नहीं था कि क्रांति में अभिशप्त संघर्ष शामिल हो। यह बम और पिस्तौल का पंथ नहीं था।
आम तौर पर लोग जैसी चीजें हैं उसके आदी हो जाते हैं और बदलाव के विचार से ही कांपने लगते हैं। हमें इसी निष्क्रियता की भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलने की जरूरत है।


9 . जो व्यक्ति विकास के लिए खड़ा है उसे हर एक रूढ़िवादी चीज की आलोचना करनी होगी, उसमें अविश्वास करना होगा तथा उसे चुनौती देनी होगी।


10 . मैं इस बात पर जोर देता हूँ कि मैं महत्त्वाकांक्षा , आशा और जीवन के प्रति आकर्षण से भरा हुआ हूँ। पर मैं ज़रुरत पड़ने पर ये सब त्याग सकता हूँ, और वही सच्चा बलिदान है।

मेरा रंग दे बसंती चोला गाना

Mera rang de basanti chola

Movie/Album: शहीद (1965)
Music By: प्रेम धवन
Lyrics By: प्रेम धवन
Performed By: मुकेश, महेंद्र कपूर, राजेंद्र मेहता

मेरा रंग दे बसंती चोला, मेरा रंग दे
मेरा रंग दे बसंती चोला ओये, रंग दे बसंती चोला
माये रंग दे बसंती चोला

दम निकले इस देश की खातिर, बस इतना अरमान है
एक बार इस राह में मरना, सौ जन्मों के समान है
देख के वीरों की क़ुरबानी, अपना दिल भी बोला
मेरा रंग दे बसंती चोला…

जिस चोले को पहन शिवाजी, खेले अपनी जान पे
जिसे पहन झाँसी की रानी, मिट गई अपनी आन पे
आज उसी को पहन के निकला, पहन के निकला
आज उसी को पहन के निकला, हम मस्तों का टोला
मेरा रंग दे बसंती चोला…

मेरा रंग दे बसंती चोला shahid divas

उम्मीद करते है आपको आज का पोस्ट पसंद आया होगा । 

धन्यवाद  

Tagged ,

About Manoranjan Pandey

I am a professional Travel writer and Blogger.
View all posts by Manoranjan Pandey →

1 thought on “मेरा रंग दे बसंती चोला ” शहीद दिवस ” | भगत सिंह के अनमोल विचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *